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बिहार में जमाबंदी की गड़बड़ी अब अधिकारी खुद खोजेंगे, 31 अक्टूबर तक सुधार का अभियान

बिहार में जमाबंदी रिकॉर्ड की गलतियों को ठीक कराने के लिए 15 सितंबर से विशेष अभियान चल रहा है। अब हर सुधार के लिए रैयत के आवेदन का इंतजार नहीं किया जाएगा। अंचल अधिकारी अधूरी और गलत जमाबंदियों की पहचान कर पुराने मूल रिकॉर्ड से मिलान कराएंगे और जरूरी सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।

मुख्य बिंदु (Key Highlights):
  • 15 सितंबर से शुरू हुआ विशेष अभियान 31 अक्टूबर तक चलेगा।
  • अंचल अधिकारी अधूरी और गलत जमाबंदियों की पहचान करेंगे।
  • पुराने मूल रिकॉर्ड से मिलान कर आवश्यक सुधार कराया जाएगा।
  • मृत जमाबंदीदारों के वारिसों के नाम दर्ज करने पर भी जोर दिया जाएगा।
  • अभियान बसेरा के तहत पात्र भूमिहीनों का आवेदन लेना जरूरी होगा।
आरा न्यूज़वाले ब्यूरो
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बिहार में जमाबंदी रिकॉर्ड सुधार अभियान और जमीन के पुराने अभिलेख
बिहार में जमाबंदी रिकॉर्ड सुधार अभियान और जमीन के पुराने अभिलेख
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बिहार, आरा न्यूज़वाले ब्यूरो: बिहार में जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज गलतियों को ठीक कराने के लिए चल रहे विशेष अभियान के तहत अब जमीन मालिकों को हर गलती के लिए अलग से आवेदन देने का इंतजार नहीं करना होगा। अंचल अधिकारी खुद अधूरी और गलत जमाबंदियों की पहचान करेंगे और उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड से मिलान कर सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने इस संबंध में अंचल अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। 15 सितंबर से शुरू हुआ यह विशेष अभियान 31 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान किसी भी अधूरी या गलत जमाबंदी को लंबित नहीं रखने का निर्देश दिया गया है।

पुराने रिकॉर्ड से होगा जमाबंदी का मिलान

अंचल स्तर पर पहले से उपलब्ध अधूरी जमाबंदियों की सूची का इस्तेमाल किया जाएगा। इन जमाबंदियों को हल्का वार चिह्नित कर संबंधित रिकॉर्ड का मूल अभिलेखों से मिलान किया जाएगा।

नाम, खाता-खेसरा, रकबा या अन्य विवरण में कमी अथवा गलती मिलने पर पुराने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर रिकॉर्ड को दुरुस्त कराया जाएगा। जरूरत पड़ने पर राजस्व कर्मचारी संबंधित हल्का में जाकर आवश्यक दस्तावेज भी जुटाएंगे।

विभाग के निर्देश के अनुसार यह अभियान विभागीय पहल पर चलाया जा रहा है। इसलिए जमाबंदी में गलती मिलने पर सुधार के लिए रैयत के आवेदन का इंतजार करने के बजाय अंचल स्तर से ही पहल करने की जिम्मेदारी तय की गई है।

मृत जमाबंदीदारों के वारिसों के नाम भी होंगे दर्ज

जमाबंदी सुधार के साथ मृत जमाबंदीदारों के वारिसों के नाम दर्ज करने पर भी जोर दिया जा रहा है। ऐसे मामलों में अंचल स्तर से पंचायत सचिव और सरपंच की मदद से वंशावली जुटाई जाएगी।

इसके आधार पर उत्तराधिकार नामांतरण की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। यदि वारिसों के बीच जमीन का आपसी बंटवारा नहीं हुआ है, तो सभी उत्तराधिकारियों के नाम से जमाबंदी अपडेट की जाएगी।

अंचल अधिकारियों को नियमित निगरानी की जिम्मेदारी

इस अभियान की जिम्मेदारी केवल राजस्व कर्मचारियों तक सीमित नहीं रखी गई है। अंचल अधिकारियों को राजस्व से जुड़े कार्यों की नियमित समीक्षा और रोजाना निगरानी करने को कहा गया है।

समीक्षा के दौरान जमाबंदी सुधार के अलावा दाखिल-खारिज, परिमार्जन, ई-मापी, जमाबंदी वेरिफिकेशन, लॉक-अनलॉक, सरकारी जमीन की पहचान और जरूरत के अनुसार अनस्कैन्ड भू-अभिलेख उपलब्ध कराने जैसे कार्यों की स्थिति भी देखी जा रही है।

अभियान बसेरा में पात्र भूमिहीनों का आवेदन लेना जरूरी

जमाबंदी सुधार के साथ अभियान बसेरा को लेकर भी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। पात्र भूमिहीन व्यक्ति वासभूमि के लिए आवेदन करता है तो उसका आवेदन हर हाल में लेने को कहा गया है। किसी पात्र व्यक्ति को आवेदन करने से रोका नहीं जा सकता।

इसके लिए पंचायत स्तर पर 22 से 25 सितंबर और अंचल स्तर पर 22 से 28 सितंबर तक शिविर लगाए जा रहे हैं। शिविरों में अंचल अधिकारियों की मौजूदगी और उनकी जिम्मेदारी तय करने को कहा गया है।

आवेदन के लिए पटना या मुख्यालय जाने की जरूरत नहीं

अभियान बसेरा के लाभुकों को आवेदन के लिए पटना या राज्य मुख्यालय जाने की जरूरत नहीं है। आवेदन संबंधित अंचल कार्यालय में जमा किया जा सकता है। ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है।

शिविरों में प्राप्त आवेदनों का निपटारा निर्धारित ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। अधिकारियों को लाभुकों को आवेदन और योजना से संबंधित सही जानकारी देने का निर्देश दिया गया है।

गलत जानकारी देकर किसी लाभुक को गुमराह करने का मामला सामने आने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

मुख्य बिंदु

  • 15 सितंबर से शुरू हुआ विशेष अभियान 31 अक्टूबर तक चलेगा।
  • अंचल अधिकारी अधूरी और गलत जमाबंदियों की पहचान करेंगे।
  • पुराने मूल रिकॉर्ड से मिलान कर आवश्यक सुधार कराया जाएगा।
  • मृत जमाबंदीदारों के वारिसों के नाम दर्ज करने पर भी जोर दिया जाएगा।
  • अभियान बसेरा के तहत पात्र भूमिहीनों का आवेदन लेना जरूरी होगा।

निष्कर्ष: विशेष अभियान के तहत बिहार में जमाबंदी रिकॉर्ड को पुराने मूल अभिलेखों से मिलाकर दुरुस्त करने और लंबित गलतियों को दूर करने की प्रक्रिया पर जोर दिया गया है। वहीं अभियान बसेरा के तहत पात्र भूमिहीनों के आवेदन लेने और उनकी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी अंचल स्तर पर तय की गई है।

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